उन्होंने प्रेस ब्रिफिंग में आगे कहा, “हम इन वार्ताओं और बातचीत में पूरी तरह सक्रिय हैं। उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति ने इस सप्ताह जो कहा, उससे साफ है कि ये बातचीत productive और जारी हैं। हम यहीं पर हैं।” लेविट ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन सौदे की संभावनाओं को लेकर सतर्क आशावादी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कल दिए गए एक इंटरव्यू में भी इसकी बात कही थी। ईरान को वाशिंगटन की स्थिति स्पष्ट रूप से बता दी गई है।

प्रेस सचिव ने जोर देकर कहा, “ईरान के हित में है कि वह राष्ट्रपति की मांगों को मानें। ट्रंप ने इन वार्ताओं में अपनी रेड लाइन्स बहुत साफ कर दी हैं।” आगामी वार्ता के स्थान के बारे में पूछे जाने पर लेविट ने कहा कि चर्चाएं “बहुत संभावना है” कि पिछले दौर की तरह ही जगह पर होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ही इस negotiation में एकमात्र मध्यस्थ है, जबकि दुनिया के कई देश मदद की पेशकश कर रहे हैं।

मॉनिटरिंग और सैंक्शंस की चेतावनी

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन ईरान से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर नजर रखे हुए है। उन्होंने चीनी बैंकों को चेतावनी दी कि अगर ईरानी पैसे उनके अकाउंट्स से गुजरते पाए गए तो सेकेंडरी सैंक्शंस लगाए जा सकते हैं।

बेसेंट ने कहा कि ईरान पहले दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवाद प्रायोजक देश था। चीन ईरानी तेल का 90% से ज्यादा खरीद रहा था। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हरमुज में ब्लॉकेड के कारण चीन की खरीदारी में रुकावट आएगी।

पाकिस्तान की मध्यस्थता प्रयास

इस बीच पाकिस्तान की सेना प्रमुख असीम मुनीर तेहरान पहुंचे हैं। वे इंटीरियर मंत्री मोहसिन नकवी के साथ ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से मुलाकात कर रहे हैं। यह दौरा “इस्लामाबाद टॉक्स” के विफल होने के बाद दूसरे दौर की वार्ता को पुनर्जीवित करने का अंतिम प्रयास माना जा रहा है।

ईरानी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का आभार जताया और कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों को दर्शाती है।

यह घटनाक्रम दो सप्ताह के नाजुक सीजफायर के बीच हो रहा है। 11-12 अप्रैल को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी अधिकारियों के बीच 21 घंटे तक चली सीधी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हुई थी। मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर था।

राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा था कि सीजफायर बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ सकती, लेकिन बातचीत से सुलझाया जाना बेहतर विकल्प है।