बिलासपुर // जब चारों ओर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मची थी, उस समय ग्राम गतौरा के सोनू बघेल, उनके पिता बैसाखू बघेल, कमलेश पात्रे, सोदान पात्रे, भैरव निषाद, जितेन्द्र गेन्डले और संतोष ने जो साहस दिखाया, वह वास्तव में काबिले तारीफ़ है।

मौके पर पहुँचते ही इन युवाओं ने बिना किसी उपकरण या सुरक्षा के, ट्रेन के मलबे में फंसे यात्रियों को निकालना शुरू किया।
कई घायलों को उन्होंने अपनी गाड़ियों से अस्पताल तक पहुंचाया और कई जिंदगियां बचाई।
मलबे में फंसे एक मासूम बच्चे को बचाने का प्रयास करते हुए उनका जज़्बा देखने लायक था।
बाद में जब बचाव दल पहुंचा, तब जाकर बच्चे को बाहर निकाला जा सका।
इन युवाओं ने न सिर्फ लोगों की मदद की बल्कि सोशल मीडिया के ज़रिए घायलों की पहचान कर उनके परिजनों तक सूचना पहुंचाई।
सच्चे अर्थों में ये ही हैं बिलासपुर के “रियल हीरो” — जिन्होंने मानवता की डोर को फिर से मजबूत किया।

