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Thursday, April 16, 2026

पुटीपखना में राशन वितरण घोटाला, 250 धनुहार, पंडो,कार्डधारी भूखे | सोसायटी संचालक पर लापरवाही का आरोप

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CG City News

कोरबा   / cgcitynews //  पुटीपखना में राशन वितरण मे लापरवाही  कोरबा  जिले के अंतर्गत ग्राम पंचायत पुटीपखना में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान में गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। बीते एक माह से लगभग 250 राशनकार्ड धारियों को निर्धारित राशन नहीं मिल पाया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। आरोप है कि सोसायटी संचालक की लापरवाही और मनमानी के कारण गरीब, मजदूर और विशेष रूप से पण्डो जनजाति के परिवार भूखे सोने को मजबूर हो रहे हैं।

राशन वितरण लापरवाही

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले महीने का पूरा राशन वितरण नहीं किया गया, जबकि चालू माह में केवल एक दिन राशन बांटने के बाद मशीन खराब होने का बहाना बनाकर वितरण रोक दिया गया। हर बार अलग-अलग कारण बताए जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजाना सोसायटी भवन के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ता है।

फूड इंस्पेक्टर  उदासीन

इस संबंध में सरपंच चंद्रप्रताप पोर्ते ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी फूड इंस्पेक्टर पोड़ी उपरोड़ा सरोज उरेती को समय रहते दे दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न तो सोसायटी संचालक पर सख्ती हुई और न ही नियमित रूप से चावल का आबंटन सुनिश्चित किया जा सका। सरपंच का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारियों तक शिकायत पहुंच चुकी है, फिर भी अगर हालात नहीं सुधर रहे हैं, तो यह प्रशासनिक उदासीनता का गंभीर उदाहरण है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि सोसायटी संचालक हर महीने अपने मनमाने तरीके से चावल वितरण करता है। कभी मशीन खराब, कभी सर्वर डाउन, तो कभी स्टॉक न होने का हवाला दिया जाता है। इस बीच केंदई गांव, बीजाडांड, पुटीपखना क्षेत्र के पण्डो जनजाति परिवारों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। मजदूरी पर निर्भर ये परिवार राशन के भरोसे जीवन यापन करते हैं, लेकिन समय पर राशन न मिलने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कई परिवारों के पास खरीदकर खाने की क्षमता नहीं है। ऐसे में सरकारी राशन ही उनका एकमात्र सहारा है। लेकिन जब वही व्यवस्था चरमरा जाए, तो भूख और कुपोषण जैसी समस्याएं पैदा होना तय है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
इस पूरे मामले ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सोसायटी संचालक की जांच कर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, मशीन खराबी के बहाने की वास्तविकता सामने लाई जाए और बकाया राशन का तत्काल वितरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए।

अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेकर ठोस कदम उठाता है, या फिर पुटीपखना के गरीब आदिवासी परिवार यूं ही भूख और परेशानी झेलते रहेंगे।

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