अतिक्रमण हटाने के दौरान बढ़ा तनाव
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी गांव में शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब वन विभाग की टीम वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची। कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों और वन कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई।
मारपीट के आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट की। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया और मौके पर नारेबाजी शुरू हो गई। ग्रामीणों ने रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर पहले पैसे लेने और बाद में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
रात में हुआ अवैध निर्माण बना विवाद की जड़
जानकारी के अनुसार, पंडरी गांव के केंनवारी क्षेत्र में वन भूमि पर बीती रात जेसीबी मशीन से मड़ई (अस्थायी निर्माण) किया गया था। बताया गया कि यहां होटल खोलने की तैयारी की जा रही थी। यह निर्माण वनरक्षक के निवास से महज 10 मीटर की दूरी पर किया गया, जिससे ग्रामीणों ने वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए।
ग्रामीणों के सवाल
ग्रामीणों ने कहा कि यदि निर्माण अवैध था, तो रात में जेसीबी से काम होते समय कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उस समय न तो मशीन जब्त की गई और न ही निर्माण रोका गया। दिन में अचानक अतिक्रमण हटाने पहुंचना संदेह पैदा करता है।
करीब एक घंटे तक बना रहा तनाव
वन विभाग की टीम जब दोपहर करीब 2:30 बजे मौके पर पहुंची, तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते आसपास के लोग भी जमा हो गए और स्थिति करीब एक घंटे तक तनावपूर्ण बनी रही।
वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से संभली स्थिति
घटना की सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया, जिसके बाद हालात पर नियंत्रण पाया गया। फिलहाल वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ईमानदारी से जांच हुई तो कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।

