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संसद के बजट सत्र में लद्दाख सीमा विवाद और जनरल नरवणे की किताब को लेकर मचे घमासान के बीच शशि थरूर का स्टैंड सबसे ज्यादा चर्चा में है। राहुल गांधी के मुखर बचाव में उतरते हुए थरूर ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहुल गांधी केवल उन तथ्यों को रख रहे थे जो पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में हैं। थरूर के अनुसार, “सरकार ने इस मामले में जरूरत से ज्यादा (Overreaction) प्रतिक्रिया दी, जिससे सदन की गरिमा और चर्चा का समय खराब हुआ।”
0 बंद कमरे में डेढ़ घंटे की चर्चा के मायने
राजनीतिक पंडितों के लिए यह केवल एक सामान्य बचाव नहीं है। उल्लेखनीय है कि बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में राहुल गांधी और शशि थरूर के बीच करीब डेढ़ घंटे तक गहन चर्चा हुई थी। इस लंबी मुलाकात के तुरंत बाद सदन के भीतर और बाहर जिस तरह से थरूर, राहुल गांधी के लिए ढाल बनकर खड़े हुए हैं, वह कांग्रेस के भीतर एक नई और मजबूत ‘केमिस्ट्री’ की ओर इशारा कर रहा है।
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0 केरल चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए ‘गुड न्यूज’
राहुल गांधी और शशि थरूर के बीच बढ़ती यह निकटता केरल विधानसभा चुनाव के लिहाज से कांग्रेस के लिए संजीवनी मानी जा रही है।
* एकजुटता का संदेश: केरल की राजनीति में इन दोनों नेताओं का अपना बड़ा आधार है। इनके बीच का समन्वय गुटबाजी की खबरों पर विराम लगाता है।
* रणनीतिक मजबूती: थरूर की बौद्धिक क्षमता और राहुल गांधी का आक्रामक नेतृत्व जब एक साथ मिलता है, तो वह संगठन के लिए बड़ी ताकत बनता है।
* सदन में बढ़ती ताकत:शशि थरूर ने जिस तरह संसदीय इतिहास और नियमों का हवाला देकर राहुल गांधी का पक्ष लिया, उसने न केवल विपक्ष के तर्क को मजबूती दी, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि अब राहुल गांधी अकेले नहीं, बल्कि पार्टी के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं के ‘कवर फायर’ के साथ मैदान में हैं।
राहुल गांधी शशि थरूर कांग्रेस पावर ट्यूनिंग
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