चैतन्य बघेल को जमानत के बाद गरमाई छत्तीसगढ़ की राजनीति
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। इस फैसले के तुरंत बाद भाजपा ने कांग्रेस और विशेष रूप से भूपेश बघेल को घेरना शुरू कर दिया। भाजपा का आरोप है कि भूपेश बघेल ने अपने बेटे को राहत दिलाने के लिए राजनीतिक दबाव और रणनीति का इस्तेमाल किया, जबकि शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को नजरअंदाज किया जा रहा है।
1. भाजपा के आरोप: ‘बेटे के लिए राजनीति, लखमा के लिए चुप्पी’
भाजपा का कहना है कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक दांव-पेच हैं। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जब बात अपने बेटे की आई तो भूपेश बघेल पूरी ताकत से सक्रिय हो गए, लेकिन कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री कवासी लखमा के मामले में वही सक्रियता नहीं दिखाई जा रही। भाजपा इसे कांग्रेस की “परिवार प्राथमिकता” की राजनीति बता रही है।
2. भूपेश बघेल का पलटवार: ‘राजनीतिक साजिश रच रही भाजपा’
भाजपा के आरोपों पर भूपेश बघेल ने कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर वह अपने बेटे को बचाना ही चाहते, तो उसे जेल जाना ही नहीं पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे शराब घोटाले मामले में जांच एजेंसियों के पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं और केवल राजनीतिक प्रतिशोध के तहत कार्रवाई की जा रही है। बघेल के अनुसार भाजपा जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश कर रही है।
3. कवासी लखमा की सेहत और जेल में हालात
कवासी लखमा से सेंट्रल जेल रायपुर में मुलाकात के बाद भूपेश बघेल ने उनकी सेहत को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिलहाल लखमा की तबीयत स्थिर है, हालांकि पिछली बार उन्हें सीने और पैर में दर्द की शिकायत थी। इसके बाद डीजीपी को पत्र लिखकर मेडिकल जांच की मांग की गई, जिस पर लखमा की जांच हुई और उन्हें दवाइयां दी गईं। बघेल ने कहा कि लखमा को जानबूझकर मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
4. जांच एजेंसियों पर सवाल: ईओडब्ल्यू और ईडी की भूमिका
पूर्व मुख्यमंत्री ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ईओडब्ल्यू अदालत के निर्देशों की अनदेखी कर रही है और खुद को कानून से ऊपर समझ रही है। भूपेश बघेल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ईडी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी है, लेकिन ईओडब्ल्यू ने अब तक रिपोर्ट पेश नहीं की है, जिससे पूरे मामले पर संदेह गहराता है।
5. प्रोडक्शन वारंट और ‘उत्पीड़न की राजनीति’
भूपेश बघेल ने हाल ही में तीन और लोगों को प्रोडक्शन वारंट पर लिए जाने को भी उत्पीड़न की राजनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य केवल लोगों को डराना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
6. कोर्ट की प्रक्रिया और देरी का आरोप
पूर्व सीएम ने कहा कि यदि ईडी ने कवासी लखमा के मामले में समय पर कोर्ट में जवाब दाखिल किया होता, तो 17 दिसंबर को ही फैसला आ सकता था। लेकिन जानबूझकर जवाब दाखिल नहीं किया गया, जिससे सुनवाई टलती रही और लखमा को ज्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने इसे “मगरमच्छ के आंसू” बताते हुए कहा कि भाजपा को दिखावटी संवेदना छोड़नी चाहिए।
7. छत्तीसगढ़ की राजनीति पर व्यापक असर
चैतन्य बघेल को मिली जमानत और कवासी लखमा का जेल में रहना, दोनों ही मुद्दे अब कानूनी से ज्यादा राजनीतिक बन चुके हैं। कांग्रेस इसे भाजपा की साजिश और बदले की राजनीति बता रही है, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को और ज्यादा ध्रुवीकृत कर दिया है और आने वाले समय में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़क तक गूंजता नजर आ सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, चैतन्य बघेल की जमानत ने केवल एक व्यक्ति को राहत नहीं दी, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई बहस और टकराव को जन्म दे दिया है। एक तरफ भाजपा इसे कांग्रेस की दोहरी नीति बता रही है, तो दूसरी तरफ भूपेश बघेल जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाकर भाजपा पर सीधा हमला बोल रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालतों के फैसले और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि यह मामला कानूनी रूप लेता है या पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा रहता है।

