सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता हादसा
1. नाबालिग की मौत ने जगाए सवाल
सोमवार रात लावाकेरा आरटीओ बैरियर के पास हुई सड़क दुर्घटना ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को एक बार फिर उजागर कर दिया। बेलडीपा का नाबालिग लड़का अपने घर लौटते समय खड़ी ट्रक से जा टकराया। ट्रक सड़क के बिल्कुल किनारे खड़ा था, लेकिन उस पर न कोई रिफ्लेक्टर था और न ही कोई चेतावनी संकेत। यही वजह रही कि अंधेरे में लड़कार ट्रक को देख ही नहीं पाया।
2. दुर्घटना का भयावह दृश्य
हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो देखा कि लड़का बुरी तरह घायल है। उसकी सांसें धीमी थीं और शरीर खून से सना हुआ था। लोग स्तब्ध थे। ऐसे दृश्यों को देखकर ग्रामीणों के मन में भय और गुस्सा दोनों पैदा हो गए। किसी ने बिना देर किए उसे उठाया और वाहन में डालकर उसे सुंदरगढ़ अस्पताल की ओर रवाना हुआ।
3. अस्पताल में मिली कड़वी खबर
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने तुरंत जांच की। लेकिन दुखद रूप से उन्होंने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों और परिजनों का रोना-बिलखना अस्पताल में गूंज उठा। यह मौत सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए सदमे की तरह थी। सभी को लगा कि यह हादसा लापरवाही का नतीजा है।
4. ट्रक नंबर पर विवाद और कर्मचारियों की भूमिका
अगले दिन जब ग्रामीणों ने आरटीओ बैरियर पहुंचकर ट्रक नंबर पूछा, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें किसी नंबर की जानकारी नहीं है। यह सुनकर ग्रामीणों में रोष बढ़ गया। कुछ ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने ट्रक को कुछ देर पहले खड़ा देखा था, इसलिए यह संभव नहीं कि आरटीओ कर्मचारी अनजान हों।
5. भीड़ का बढ़ना और तनाव
देखते-देखते वहां बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए। लोग कर्मचारियों को घेरकर सवाल पूछने लगे। कुछ ग्रामीणों ने तो कर्मचारियों पर यह तक आरोप लगा दिया कि उन्होंने ट्रक चालक को मामले से बचाने के लिए उसे भगा दिया है। इस दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
6. अधिकारियों का मौके पर पहुंचना
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फरसाबहार तहसीलदार और तपकरा थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पहले ग्रामीणों को शांत कराया और घटना की जानकारी ली। ग्रामीण अधिकारियों से यह अपेक्षा कर रहे थे कि वे तुरंत कार्रवाई का भरोसा दें।
7. चर्चा और ज्ञापन के बाद समाधान
उपसरपंच दुर्गेश बाजपेयी सहित दर्जनों ग्रामीणों ने अधिकारियों को लिखित ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया कि इस मामले में आरटीओ चौकी की भूमिका संदिग्ध लग रही है। करीब दो घंटे की बातचीत के बाद अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। ग्रामीण धीरे-धीरे शांत हुए और मामले को शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित कर लिया गया।

