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Wednesday, April 22, 2026

दस हजार रुपये और बकरे के लिए नाबालिग के अपहर्ता को छोड़े जाने का आरोप, पसान थाना के पुलिस कर्मियों पर अवैध वसूली का गंभीर आरोप

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CG City News

कोरबा | छत्तीसगढ़ | पसान //बड़ी खबर
दस हजार रुपये और बकरे के लिए नाबालिग के अपहरणकर्ता को छोड़े जाने का आरोप कोरबा जिले के पसान थाना क्षेत्र से सामने आया है। इस मामले में पसान थाना के पुलिस कर्मियों पर अवैध वसूली और गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं, जिससे कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नाबालिग बाजार गई, वापस नहीं लौटी
क्या है पूरा मामला
पुलिस के आला अधिकारियों ने महिला संबंधी अपराध में त्वरित कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन थाना चौकियों में पदस्थ पुलिस कर्मी उनके मंसूबे पर पानी फेर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें महज दस हजार नगदी व बकरे के लिए नाबालिग के अपरहणकर्ता को छोड़ दिया गया। हद तो तब हो गई, जब पुलिस कर्मियों के बहकावे में आकर नाबालिग घर लौटने के कुछ ही घंटे बाद पुनः लापता हो गई। पुलिस अधीक्षक से पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है।

दरअसल पसान थाना क्षेत्र में रहने वाला एक परिवार सोमवार की शाम पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा था। परिवार ने पुलिस अधीक्षक के नाम एक शिकायत पत्र प्रस्तुत किया है। शिकायत पत्र के मुताबिक परिवार की नाबालिग बेटी 26 नवंबर को साप्ताहिक बाजार जाने के नाम पर निकली, फिर लापता हो गई। परिजनों ने पतासाजी की तो शनि नामक युवक के साथ अंतिम बार देखे जाने की जानकारी हाथ लगी। जिसकी शिकायत परिजनों ने थाना पहुंचकर की। पुलिस ने नामजद के बजाय नाबालिग के अपहरण के मामले मे अज्ञात आरोपी के खिलाफ जुर्म दर्ज कर लिया। पसान थाने से फोन कर 2 जनवरी को पीड़ित परिवार को बुलाया गया।

जब पीड़ित थाने पहुंचे तो दस्तावेज में दस्तखत कराते हुए बयान दर्ज कराने कटघोरा न्यायालय चलने की बात कही गई। परिजन वाहन में जाकर बैठ गए। उनके बाद नाबालिग भी वाहन में बैठी तो परिजनों को उसके मिल जाने की जानकारी हुई। किसी कारणवश कोर्ट में बयान दर्ज नही हो सका। पुलिस कर्मियों ने नाबालिग के साथ परिजनों को घर लौट जाने की सलाह दी। घर पहुंचने के बाद नाबालिग ने जो जानकारी दी, उसने परिजनों को भी चौंका दिया। उसने परिजनों को बताया कि शनि से एसआई कुर्रे व आरक्षक मधुकर ने दस हजार रूपए लिया है। उन्होंने शनि से बकरे की मांग भी की है। उन्होंने कहा है कि वह बयान दर्ज कराने के बाद शनि के साथ जा सकती है। यह बात नाबालिग के दिमाग में घर कर गई। वह करीब आधे घंटे बाद ही परिजनों को बिना बताए कहीं चली गई, जिसकी जानकारी पीड़ित परिवार ने रात में ही फोन कर पसान पुलिस को दी। पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस कर्मियों का कृत्य न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि नाबालिग बालिका की सुरक्षा से खिलवाड़ है। पीड़ित परिवार को नाबालिग के संबंध में पूछताछ करने पर धमकी मिल रही है। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई व लापता नाबालिग को सुरक्षित दस्तयाब करने की मांग की है।

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एफआईआर में लापरवाही, आरोपी को बताया गया अज्ञात
पीड़ित का आरोप है कि शिकायत के बावजूद पुलिस द्वारा प्रारंभिक रिपोर्ट में आरोपी युवक को अज्ञात दर्शाया गया, जबकि परिजनों ने उसका नाम स्पष्ट रूप से बताया था। इससे परिजनों में पुलिस की भूमिका को लेकर संदेह गहराता चला गया।
₹10,000 लिया और बकरे की मांग का आरोप
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख है कि पसान थाना के एक एसआई कुर्रे और आरक्षक मधुकर द्वारा आरोपी युवक से ₹10,000 नकद लिया और एक बकरे की मांग की गई। परिजनों का कहना है कि बयान दर्ज कराने और मामले को रफा-दफा करने के लिए यह सौदेबाजी की गई।
बताया गया कि उक्त पुलिस कर्मियों ने अपने बातो  से नाबालिग बालिका को भ्रमित किया गया, जिससे वह घर लौटने के कुछ समय बाद बिना बताए फिर से चली गई।
कटघोरा न्यायालय में बयान दर्ज नहीं
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें कटघोरा मजिस्ट्रेट न्यायालय बयान दर्ज कराने के लिए ले जाया गया, लेकिन वहां न तो बयान दर्ज हुआ और न ही कोई स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बाद पुलिस द्वारा घर लौटने की सलाह दी गई।
पुलिस अधीक्षक ने दिए जांच के निर्देश
मामले के सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक कोरबा ने इसे गंभीरता से लेते हुए डीएसपी स्तर की जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर संबंधित पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।
कानून विशेषज्ञों की राय
कानून जानकारों के अनुसार, यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं तो यह मामला POCSO Act, पुलिस आचरण नियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा।
पीड़ित परिवार ने की न्याय की मांग
पीड़ित परिवार ने मांग की है कि—
नाबालिग बालिका की तत्काल सुरक्षित बरामदगी हो
दोषी पुलिस कर्मियों पर कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए
परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए

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