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Thursday, April 16, 2026

राज्य में बिजली दर वृद्धि रद्द, उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली।

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CG City News

मुंबई। राज्य में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) के उस समीक्षा आदेश को रद्द कर दिया, जिससे उपभोक्ताओं पर बिजली दरें बढ़ गई थीं। अदालत ने आदेश देते हुए आयोग को जनहित में नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता संगठनों द्वारा बढ़ी हुई दरों का विरोध लंबे समय से किया जा रहा था। बिजली कंपनियों ने वित्तीय घाटे का हवाला देते हुए दरें बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन जन-असंतोष को देखते हुए फैसला उपभोक्ता पक्ष में गया।​

राज्य में बिजली दर वृद्धि को रद्द करने का निर्णय न लिया गया होता, तो आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ अनिवार्य रूप से बढ़ गया होता। उपभोक्ताओं ने बार-बार मांग की थी कि दरें न बढ़ाई जाएं। बिजली कंपनियों द्वारा घाटे का हवाला देकर हर साल दर वृद्धि का प्रस्ताव पेश किया जाता था, जिसका विरोध व्यर्थ समझा जा रहा था। यदि न्यायालय ने एमईआरसी के आदेश को रद्द न किया होता, तो सौर ऊर्जा के ग्राहक भी कम घंटों तक ही बैंकिंग सुविधा का लाभ उठा सकते थे। उस दशा में जनता व उद्योग दोनों ही वित्तीय संकट से जूझने पर मजबूर हो जाते। जनता सरकार व आयोग से निराश हो जाती और उनका विश्वास टूट जाता।​

अगर बिजली दरें बढ़ती रहतीं तो राज्य भर में विरोध प्रदर्शन तेज़ हो सकते थे। उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिलती और निजी कंपनियों को ही लाभ होता। आर्थिक विषमता, कृषकों व छोटे व्यवसायियों पर अतिरिक्त संकट बढ़ जाता। लोगों को लगता कि कोई उनकी समस्याओं को नहीं सुनता। इस प्रकार, बिजली दर वृद्धि रद्द करने का निर्णय न होता तो उपभोक्ता हितों की अवहेलना निश्चित थी।

अब उपभोक्ता परिषद का कहना है कि आयोग को इसी तरह उपभोक्ता हित में काम करना चाहिए। राज्य में वर्षों से बिजली दरें स्थिर रही हैं और विशेषज्ञों की मांग है कि कंपनियों के अधिशेष को उपभोक्ताओं को लौटाया जाए। फैसला आने के बाद उपभोक्ताओं ने राहत की भावना जताई है।


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