जबरन धर्म परिवर्तन पर बढ़ती चिंता
पिछले कुछ समय में छत्तीसगढ़ में जबरन धर्म परिवर्तन की शिकायतों ने सरकार को गंभीर रूप से चिंतित किया है। कई जिलों से मिली रिपोर्टों ने राज्य सरकार को यह महसूस कराया कि मौजूदा कानून पर्याप्त नहीं है।
सरकार की रणनीतिक तैयारी
विष्णुदेव साय सरकार इस मुद्दे पर रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाते हुए शीतकालीन सत्र में एक नया, कठोर और सर्वसमावेशी विधेयक लाने जा रही है। यह विधेयक न केवल 1968 के कानून को बदलेगा, बल्कि इसे अधिक मजबूत भी बनाएगा।
क्यों जरूरी हुआ नया कानून?
1968 के कानून में सजा और जुर्माना बहुत कम था। कानूनी प्रावधान अस्पष्ट थे, जिनका दुरुपयोग किया जाता था। यही वजह है कि सरकार अब ऐसे प्रावधान ला रही है जिसमें:
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जबरन धर्म परिवर्तन अपराध माना जाएगा
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सजा 10 साल तक
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प्रशासनिक निगरानी बढ़ेगी
अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन
सरकार ने नौ राज्यों के कानूनों का अध्ययन करके यह समझने की कोशिश की कि कौन सा मॉडल सबसे प्रभावी है। इससे नए विधेयक का ढांचा और भी मजबूत हो गया है।
60 दिन की सूचना अनिवार्यता का उद्देश्य
धर्म परिवर्तन के इच्छुक व्यक्ति या संस्था को 60 दिन पहले सूचना देने का उद्देश्य है कि प्रशासन मामले की जांच कर सके और सुनिश्चित कर सके कि इस पर किसी प्रकार का दबाव या लालच नहीं है।
प्रलोभन की नई परिभाषा
नए कानून में ‘प्रलोभन’ की परिभाषा के दायरे को बढ़ाया जाएगा। इसमें आर्थिक मदद, शिक्षा, नौकरी का वादा, इलाज, सामाजिक सुरक्षा आदि सभी को शामिल किया जाएगा। इससे जांच और भी प्रभावी हो सकेगी।
समाज पर संभावित प्रभाव
यदि यह कानून लागू होता है तो धार्मिक स्वतंत्रता बनी रहेगी, साथ ही किसी समुदाय पर दबाव बनाकर मतांतरण करने वालों की गतिविधियों पर रोक लग सकेगी।

