श्रीनगर की ठंडी सुबह थी। सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। तभी कुछ पोस्टर लोगों की नज़र में आए —
जिन पर लिखा था, “जैश-ए-मोहम्मद जिंदाबाद।”
पुलिस हरकत में आई। शहर के सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए।
एक फुटेज में दिखा — एक युवक रात में पोस्टर चिपका रहा था।
फुटेज साफ़ नहीं था, लेकिन तकनीकी जांच से नाम सामने आया — डॉ. आदिल अहमद राठर, जो इस समय सहारनपुर में डॉक्टर के रूप में काम कर रहा था।
श्रीनगर पुलिस की एक टीम तुरन्त रवाना हुई।
रात का समय था जब सहारनपुर में अंबाला रोड के अस्पताल पर दबिश दी गई।
अंदर मरीज थे, स्टाफ था, लेकिन पुलिस ने सीधे डॉक्टर के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया।
“डॉ. आदिल?”
उन्होंने चौंककर देखा। कुछ पूछने से पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
पूछताछ में सामने आया कि वो कश्मीर के अनंतनाग जिले के रहने वाले हैं। हाल ही में उन्होंने सहारनपुर की एक महिला डॉक्टर से निकाह किया था।
उनका मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया अकाउंट जब्त कर लिए गए।
सुबह होते-होते खबर पूरे शहर में फैल चुकी थी।
अख़बारों के शीर्षक थे — “डॉक्टर गिरफ्तार, आतंक से जुड़ाव का शक।”
श्रीनगर पुलिस आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर रवाना हो चुकी थी।
सहारनपुर में अब जांच चल रही थी — कि क्या कोई और भी इसमें शामिल है।
और इस तरह एक कहानी खत्म हुई —
लेकिन सवाल अब भी ज़िंदा हैं —
एक डॉक्टर आतंक की तरफ क्यों मुड़ा?
किसने उसकी सोच को बदला?

