जगदलपुर
दंतेवाड़ा जिला के किरंदुल, बचेली में रहने वाले लगभग 40 परिवार को उनके घर और जमीन से बेदखल की कार्यवाही को लेकर बस्तर मुक्ति मोर्चा ने विरोध किया है।
संस्था प्रमुख नवनीत चांद ने जारी बयान में कहा है कि सरकार नक्सलवाद खत्म करने का दावा कर रही है। जब नक्सली गतिविधियां कम होती दिखी तो सरकार अब बस्तर में रहने वाले आदिवासियों को बेघर करने प्रशासनिक ताकत झोंक रही है।
उन्होंने कहा कि पुनर्वास पैकेज और भूमि अधिग्रहण अधिनियम और पांचवी अनुसूची के पेसा कानून को दरकिनार कर उद्योगपतियों के लिए सरकार के दबाव पर प्रशासनिक अधिकारी काम कर रहे हैं। बस्तर के जनप्रतिनिधि नेताओं की कठपुतली बन गए है। 27 नवंबर को दंतेवाड़ा जिला इकाई के नेतृत्व में दंतेवाड़ा मुख्यालय के वन मंडल अधिकारी एवं कलेक्टर से मुलाकात किया गया एवं अधिकारियों के सामने स्लरी पाइपलाइन से प्रभावित सभी परिवारों के पुनर्वास एवं आर्थिक सहयोग और संपूर्ण मामले की जांच की मांग रखी गई।
उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत 2005 से पहले वन भूमि में काबिज सभी लोगों को पट्टा देने का प्रावधान है। राजस्व जमीन पर 15 साल से अधिक काबिज लोगों को विभिन्न योजनाओं के तहत पुनर्वासित करने का प्रावधान है। इन सभी चीजों को दरकिनार कर एक तरफा कार्यवाही किया जा रहा है।
नवनीत ने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रभावितों को उचित न्याय नहीं मिलता है तो बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जें सड़क की लड़ाई लड़ने को तैयार रहेगी। इस दौरान दंतेवाड़ा जिला अध्यक्ष रेमो मरकामी, संभागीय महामंत्री रामनाथ नेगी, मजदूर यूनियन अध्यक्ष लखमा को राम, मजदूर यूनियन सचिव कुरसो राम मौर्य, सुकमा जिला अध्यक्ष पी प्रसाद राजू, किरंदुल मंडल अध्यक्ष विजय कुमार सोनवानी, जगदीश नायक मीडिया प्रभारी, जगदलपुर युवा विंग अध्यक्ष हिमांशु आनंद, कोर कमेटी अध्यक्ष रमेश यादव, बचेली यूथ अध्यक्ष हिडमा पोड्याम आदि पदाधिकारी एवं प्रभावित क्षेत्र के लोग उपस्थित थे।

