विषय: “साइबर अपराध के विरुद्ध नई उम्मीद — आरक्षी सुनील रावत”
वक्ता: पुलिस अधीक्षक, सोनभद्र
साथियो,
आज मैं गर्व और प्रसन्नता के साथ इस मंच पर खड़ा हूँ, क्योंकि हमारे बीच एक ऐसा प्रहरी है जिसने न केवल वर्दी की गरिमा को बढ़ाया, बल्कि पुलिस सेवा की आत्मा को जीवंत कर दिया है — आरक्षी सुनील कुमार रावत।
सोनभद्र के इस कर्मठ पुलिसकर्मी ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि नीयत सच्ची हो और कर्मनिष्ठा अडिग हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
डिजिटल युग में अपराध का रूप भले बदल गया हो, लेकिन हमारे सिपाही की निष्ठा आज भी वही है — अटल, दृढ़ और जनसेवी।
साथियो,
हम सब जानते हैं कि साइबर अपराध आज समाज के लिए नई चुनौती बन चुका है। कोई युवक अपनी मेहनत की कमाई गंवाता है, तो कोई बुजुर्ग अपनी जीवनभर की बचत।
ऐसे में जब किसी पीड़ित की उम्मीदें टूटने लगती हैं, तब कोई सुनील रावत सामने आता है और कहता है — “हम हैं न, आपको न्याय मिलेगा।”
और यही शब्द — यही भावना — पुलिस और जनता के बीच सेतु का काम करती है।
आरक्षी सुनील रावत ने अपनी तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई से 42 पीड़ितों को ₹10,02,027 की राशि वापस दिलाई।
यह केवल एक आँकड़ा नहीं है, यह 42 परिवारों की राहत, विश्वास और कृतज्ञता की कहानी है।
उनकी मेहनत के बल पर 50 से अधिक बैंक खाते फ्रीज हुए, कई साइबर ठगों की योजनाएँ विफल हुईं, और आईटी एक्ट के मामलों में पुलिस को नई दिशा मिली।
मैंने स्वयं उन्हें यह सम्मान — “कॉप ऑफ द मंथ” — प्रदान करते समय देखा, कि किस गर्व से साथी अधिकारी ताली बजा रहे थे। वह ताली किसी पुरस्कार की नहीं, बल्कि सेवा भावना की स्वीकृति थी।
साथियो,
मैं आप सबसे यह अपील करता हूँ — अपने आसपास के लोगों को जागरूक कीजिए। किसी भी साइबर ठगी की घटना पर तुरंत पुलिस को सूचित कीजिए।
याद रखिए — अपराधी की सबसे बड़ी ताकत हमारी चुप्पी होती है, और हमारी सबसे बड़ी ताकत — हमारी तत्परता।
आरक्षी सुनील रावत जैसे पुलिसकर्मी हमारे बल की रीढ़ हैं। उनकी तस्वीर अब हर थाने में लगाई जाएगी, ताकि हर जवान यह महसूस कर सके कि “सेवा और तकनीक” का संगम ही आधुनिक पुलिसिंग की असली पहचान है।
आइए, हम सब मिलकर ऐसे उदाहरणों को अपना प्रेरणास्रोत बनाएं।
क्योंकि जब एक सिपाही 10 लाख रुपये वापस दिला सकता है, तो एक संगठित पुलिस बल पूरे समाज की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।
जय हिंद।
जय उत्तर प्रदेश पुलिस।

