“सर, क्या गरीब आदमी को भी वकील मिल सकता है?”
विद्यालय का एक छात्र मासूमियत से पूछ बैठा।
मंच पर बैठे अपर जिला जज नरेन्द्र नाथ त्रिपाठी मुस्कराए —
“हाँ बेटा, यही तो इस कार्यक्रम का उद्देश्य है — हर नागरिक को न्याय का अधिकार देना।”
सीतापुर में सोमवार को आयोजित विधिक सेवा दिवस के शिविर में ऐसा ही संवादमय वातावरण था।
कोई पूछ रहा था कि “लोक अदालत में मामला कैसे सुलझता है?”, तो कोई जानना चाहता था कि “टोल फ्री नंबर 15100 पर क्या सच में सलाह मिलती है?”
अधिवक्ताओं भगीरथ वर्मा, सुजीत बाजपेई, विमल मोहन मिश्र और भूपेन्द्र दीक्षित ने एक-एक कर सबकी शंकाओं का समाधान किया।
उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति, जनजाति, महिलाएँ, विकलांग, बच्चे, ट्रांसजेंडर व्यक्ति और कम आय वाले नागरिक मुफ्त कानूनी सहायता पा सकते हैं।
जब श्रीमती बच्ची देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का उदाहरण दिया गया, तो सभी श्रोताओं ने समझा कि कानून केवल अदालत की दीवारों में नहीं, बल्कि हर नागरिक की सुरक्षा में बसता है।
अंत में बच्चों ने कहा, “हम यह जानकारी घर-घर तक पहुँचाएँगे।”
और तभी सभा में तालियों की गूंज उठी — जैसे न्याय का संदेश हवा में फैल गया हो।

