डीएम: “मिश्रिख के तालाब का सौंदर्यीकरण कब पूरा होगा?”
ईओ: “सर, थोड़ी तकनीकी समस्या…”
डीएम (सख्त स्वर में): “समस्या नहीं, समाधान चाहिए। जब तक काम शुरू नहीं होगा, आपका वेतन रुका रहेगा।”
ऐसे ही एक-एक बिंदु पर जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. ने अधिकारियों से सीधी बात की।
बैठक में मौजूद हर अधिकारी समझ गया कि अब समय जवाबदेही का है।
डीएम: “हर सप्ताह तीन वार्डों का निरीक्षण अनिवार्य है। तस्वीरें और रिपोर्ट भेजी जाएंगी।”
अधिशासी अधिकारी: “जी सर, हम सोमवार से ही शुरू करेंगे।”
डीएम: “कमांड एंड कंट्रोल सेंटर सीतापुर में सफल है, बाकी निकायों में कब तक लागू होगा?”
तकनीकी अधिकारी: “दो सप्ताह में प्रस्ताव भेज देंगे।”
डीएम: “अच्छा। और सामुदायिक शौचालय? गंदगी नहीं दिखनी चाहिए।”
बैठक में माहौल गंभीर था, पर उद्देश्य स्पष्ट — सीतापुर की व्यवस्थाओं में सुधार।
राजस्व वसूली, अवैध कब्जे और पीपीपी मॉडल पर भी खुलकर चर्चा हुई।
अंत में डीएम ने कहा — “विकास कार्यों में ईमानदारी सबसे बड़ी नीति है। इसे अपनाइए।”

