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Madhya Pradesh
Wednesday, April 22, 2026

कई सहकारी समितियों में लटके ताले देख लौटने को मजबूर हुए किसान * कर्मचारी के हड़ताल पर होने से धान खरीदी अधर में

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CG City News

कोरबा ) // अपनी चार मांगों को लेकर आदिवासी सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक और कर्मचारी हड़ताल पर है। सरकार ने एसमा का डर दिखाया लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हुआ। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के कई केंद्रों में वैकल्पिक रूप से नई नियुक्ति की गई है, लेकिन कर्मियों का अता-पता नहीं है। ऐसी स्थिति में किसान यहां पहुंच कर बैरंग लौटने मजबूर है।

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आदिवासी सेवा सहकारी समिति में अभी भी ताले लटके नजर आ रहे हैं। प्रशासन में स्थिति को सामान्य करने के लिए कोशिश शुरू की है, लेकिन इसके कोई खास परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत कृषक वर्ग को राहत देने के लिए प्रशासन की ओर से अनेक समितियां में कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति की गई है ताकि व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके। इस तरह के आदेश होने पर भी नए कर्मचारियों के द्वारा मौके पर कामकाज ग्रहण नहीं किया गया है।
बताया गया कि टोकन के आधार पर लोगों को अपनी पैदावार बेचने की तारीख दी जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल इसी बात का है कि जब केंद्र में कर्मचारी और श्रमिक ही उपस्थित नहीं है तो धान की खरीदी आखिर कैसे हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में टोकन लेकर जाने वाले कर्मचारी भी उपार्जन केंद्रों से वापस लौटने को विवश है। कर्मचारियों का दबाव बनाने के लिए शुरुआती स्तर पर कोरबा जिले में दो खरीदी केंद्रों के प्रबंधक के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
माना जा रहा था कि इससे दूसरे केंद्रों के कर्मचारियों पर दबाव बढ़ेगा और वह हड़ताल छोडकर कार्यस्थल पर लौटने की मानसिकता बनाएंगे, लेकिन यह नहीं हुआ। वर्तमान में सेवा सहकारी समितियां का स्टाफ हड़ताल पर है। दूसरी ओर धान खरीदने के लिए कृषि, राजस्व और खाद्य विभाग के जिन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है उन्होंने भी अपने हाथ लगभग खींच लिए हैं। ऐसे में 31 जनवरी तक कोरबा जिले में 30 लाख मैट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य कैसे पूरा हो सकेगा, यह अपने आप में चिंता का विषय तो बना हुआ ही है।

 


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