हजारों-लाखों फ्लेमिंगो से राजस्थान की सांभर झील बनी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र।

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फ्लेमिंगो की मौजूदगी से जीवंत हुई सांभर

सांभर झील का नाम आते ही अब लोगों के मन में ‘गुलाबी समंदर’ की तस्वीर उभरने लगी है। हजारों की संख्या में पहुंचे फ्लेमिंगो पक्षियों ने इस ऐतिहासिक झील को एक बार फिर चर्चा का केंद्र बना दिया है। झील का शांत वातावरण, खारा पानी और खुले विस्तार फ्लेमिंगो के लिए आदर्श हैबिटैट प्रदान करते हैं।

बर्ड एक्सपर्ट्स बताते हैं कि माइग्रेशन आमतौर पर अक्टूबर में शुरू होता है और मार्च तक चलता है। इस दौरान झील में लेसर फ्लेमिंगो और ग्रेटर फ्लेमिंगो के बड़े झुंड दिखाई देते हैं। इनके साथ कई प्रजातियों की बत्तखें और अन्य प्रवासी पक्षी भी यहां पहुंचते हैं।

लगभग 240 वर्ग किलोमीटर में फैली सांभर झील भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारी झील है। बारिश अच्छी होने पर यहां पानी का स्तर बढ़ता है और भोजन की उपलब्धता भी बेहतर होती है। यही वजह है कि इस साल पक्षियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

पर्यटन के लिहाज से भी यह समय बेहद खास है। फोटोग्राफर और बर्डवॉचर इस अनोखे दृश्य को कैमरे में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।


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